SSC Exams की तैयारी कैसे करें

First published on: 2020-12-03 All Blogs

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SSC क्या है?

स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (Staff Selection Commission) को संक्षेप में SSC कहते हैं. हिंदी में इसे ‘कर्मचारी चयन आयोग’ कहा जाता है. स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (Staff Selection Commission) को पहले ‘अधीनस्थ सेवा आयोग’ (Subordinate Service Commission – सबऑर्डिनेट सर्विस कमीशन) के नाम से जाना जाता था.

भारत सरकार द्वारा ‘अधीनस्थ सेवा आयोग’ का गठन 4 नवंबर, 1975 को किया गया था. लेकिन, 26 सितंबर, 1977 को सबऑर्डिनेट सर्विस कमीशन का नाम परिवर्तन कर इसे ‘स्टाफ सेलेक्शन कमीशन’ (Staff Selection Commission - कर्मचारी चयन आयोग) कर दिया गया.

SSC Exams क्या है?

SSC भारत सरकार का एक केंद्रीय संगठन है, जो विभिन्न प्रकार की परीक्षाएं आयोजित करता है, जैसे- सीजीएल (CGL), सीएचएसएल (CHSL), स्टेनो (Steno), जेई (JE) आदि. इसमें SCC CGL Exam और SCC CHSL Exam सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं, क्योंकि इसके अंतर्गत हर वर्ष लाखों युवाओं को जॉब्स मिलता है. इन सभी परीक्षाओं को सामूहिक रूप से SSC Exams कहते हैं.

SSC CGL Exams

SSC CGL Exams ग्रेजुएट लेवल की परीक्षा होती है. यहां CGL का फुल फॉर्म है - कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (Combined Graduate Level). इसमें एग्जाम देने के लिए कैंडिडेट को कम-से-कम ग्रेजुएट होना अनिवार्य है. इस एग्जाम को पास करने के बाद कैंडिडेट इनकम टैक्स इंस्पेक्टर, ऑडिट ऑफिसर, अपर डिवीजन क्लर्क जैसे पदों पर नियुक्त किए जाते हैं.

SCC CHSL Exams

SCC CHSL Exams देने के लिए कैंडिडेट को 10+2 यानी बारहवीं पास होना होना अनिवार्य है. यहां CHSL का फुल फॉर्म है - कंबाइंड हायर सेकेंडरी लेवल (Combined Higher Secondary Level). SCC CHSL Exams संभवतः भारत का सबसे लोकप्रिय एग्जाम है, जिसमें लाखों युवा एक साथ अपीयर होते हैं. इस एग्जाम को पास करने के बाद कैंडिडेट डाटा एंट्री ऑपरेटर, लोअर डिवीजन क्लर्क, कोर्ट क्लर्क और डाक सहायक जैसे पदों पर नियुक्त किए जाते हैं.

SSC Exams की तैयारी कैसे करें?

किसी भी एग्जाम की तैयारी के लिए यह जानना जरुरी है कि एग्जाम का फॉर्मेट क्या है, उसका सिलेबस कैसा है, इस सिलेबस की तैयारी के लिए क्या पढ़ना है और क्या नहीं पढ़ना है आदि-आदि. इसके साथ ही आपका पैशन (passion), आपकी कड़ी मेहनत, आपकी अध्ययन प्रणाली और अध्ययन की दिशा, समय प्रबंधन और अध्ययन सामग्री की उपलब्धता आदि पहलुओं को भी बराबर ध्यान में रखना उतना ही जरुरी है. ये बातें SSC Exams की तैयारी के लिए भी ज्यों-की-त्यों लागू होती है.

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SSC Exams का फॉर्मेट

SSC हर एग्जाम के लिए एक फॉर्मेट यानी पैटर्न जारी करती है. सामान्यतः SSC Exams तीन चरणों में संपन्न होती है:

A. प्रथम चरण (First Phase): सबसे पहले चरण में कैंडिडेट को ऑनलाइन परीक्षा में बैठना होता है, जिसमें Multiple Choice Questions (MCQs) यानी बहुविकल्पीय प्रश्न या ऑब्जेक्टिव प्रश्न (Objective Questions) पूछे जाते हैं.

B. द्वितीय चरण (Second Phase): इस चरण में 100 अंकों की एक वर्णनात्मक परीक्षा यानी डिस्क्रिप्टिव एग्जाम (Descriptive Exam) होती है. लेकिन, SSC Exams का यह चरण हर एग्जाम के लिए हो, यह जरुरी नहीं है.

C. तृतीय चरण (Third Phase): SSC Exams का यह चरण भी हर एग्जाम के लिए हो, यह आवश्यक नहीं है. यह एग्जाम प्रायः उन पदों के लिए लिया जाता है, जहां कंप्यूटर ज्ञान परखना आवश्यक होता है, जैसे- डाटा एंट्री ऑपरेटर आदि.

उम्मीद है कि आपको ऊपर बताया गया SSC Exams का फॉर्मेट समझ में आ गया होगा. SSC बाकायदा हर एग्जाम के लिए फॉर्मेट की नोटिफिकेशन जारी करती है. आपको अपनी तैयारी उसी के अनुरूप करनी चाहिए.

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SSC Exams का सिलेबस

SSC Exams के सिलेबस को समझना बहुत जरुरी है, तभी आप दूसरे कैंडिडेट से बेहतर तैयारीयारी कर सकते हैं.

प्रथम चरण का सिलेबस: जैसा कि ऊपर बताया गया है कि SSC Exams के प्रथम चरण में Multiple Choice Questions (MCQs) यानी बहुविकल्पीय प्रश्न या ऑब्जेक्टिव प्रश्न (Objective Questions) पूछे जाते हैं, वह सामान्यतः यह 200 अंकों की होती है, जिसमें 100 MCQs होते है. इन सभी 100 प्रश्नों को 60 मिनट (एक घंटा) के अंदर सॉल्व करना होता है. ये MCQs चार सेक्शन में बंटे होते हैं:

1. संख्यात्मक अभियोग्यता यानी क्वांटिटेटिव ऐप्टीट्यूड (Quantitative Aptitude - QA)

2. सामान्य बुद्धि और तर्क शक्ति यानी जेनरल इंटेलिजेंस एंड रीजनिंग (General Intelligence and Reasoning – GI&R)

3. अंग्रेजी भाषा एवं बोध (कॉम्प्रिहेंशन) यानी इंग्लिश लैंग्वेज एंड कॉम्प्रिहेंशन (English Language & Comprehension)

4. सामान्य ज्ञान यानी जेनरल नॉलेज, जिसे जेनरल अवेयरनेस भी (General Awareness – GA) कहते हैं.

यहां प्रत्येक सेक्शन में सामान्यतः 25 ऑब्जेक्टिव प्रश्न होते हैं. हालांकि प्रश्नों की संख्या SSC Exams के अनुसार घट-बढ़ सकती है. यहां नोट करने लायक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि सामान्यतः यहाँ नेगेटिव मार्किंग (Negative Marking) भी लागू होती है. इसका मतलब यह हुआ कि प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 0.25 अंक काटे जाते हैं.

इसके अलावा यदि कोई पोस्ट टेक्निकल है, जैसे- जूनियर इंजीनियर (JE), तो उससे संबंधित विषय का भी क्वेश्चन पेपर होता है. उसकी परीक्षा प्रायः इसके साथ ही होती है. लेकिन, यह अलग से भी लिया जा सकता है. SSC इसकी नोटिफिकेशन जारी करता है.

द्वितीय चरण का सिलेबस: SSC Exams की जिन परीक्षाओं में द्वितीय चरण की परीक्षा होती है, तो उसमें सामान्यतः निबंध लेखन, पत्र लेखन, रिपोर्ट लेखन आदि से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं.

तृतीय चरण का सिलेबस: SSC Exams की जिन परीक्षाओं में तृतीय चरण की परीक्षा होती है, उसमें सामान्यतः कंप्यूटर और संबंधित पदों के अनुसार सॉफ्टवेयर को हैंडल करने की योग्यता को जांचा-परखा जाता है. जैसे, डाटा एंट्री ऑपरेटर के लिए कैंडिडेट को MS Office, Tally आदि पर अच्छी पकड़ होनी चाहिए.

कृपया नोट कर लें कि SSC केवल अपने Syllabus के अनुसार ही प्रश्न पूछता है. सिलेबस को सही जानें बिना SSC Exams में सफल होना लगभग नामुकिन नहीं है. हर एग्जाम के लिए SSC हर बार सिलेबस जारी करती है. इसलिए हर एग्जाम के लिए हर बार सिलेबस को जरुर देखें और केवल उसी के अनुसार तैयारी करें. जो सिलेबस में नहीं है, उसकी तैयारी में समय देना समय को नष्ट करने जैसा ही होगा.

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SSC Exams का पिछला कट-ऑफ जानें

किसी भी SSC Exams के लिए किसी भी कैंडिडेट को किस स्तर यानी किस लेवल की तैयारी करनी है, इसके लिए SSC Exams का पिछला कटऑफ जानना बहुत जरुरी है. इससके लिए पिछले एग्जाम या पिछले वर्ष के क्वेश्चन पेपर के उस कट-ऑफ मार्क की जानकारी प्राप्त करें, जिसके ऊपर कैंडिडेट का सेलेक्शन हुआ था. यह आपकी तैयारी के लेवल को तय करने और कम्पटीशन के लेवल को जानने में आपकी सहायता करता है.

पिछले वर्ष के क्वेश्चन पेपर का कट-ऑफ मार्क बहुत अधिक है, तो वर्तमान वर्ष के क्वेश्चन पेपर का कट-ऑफ मार्क भी अधिक होने की संभावना है. हालांकि यह कोई आवश्यक नियम नहीं है. लेकिन, एक अच्छी तैयारी करने के लिए और प्लानिंग और रणनीति बनाने में यह काफी सहायक सिद्ध होता है.

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अध्ययन सामग्री और गाइडबुक

SSC Exams एक प्रतियोगिता परीक्षा है, जहां लाखों की संख्या में कैंडिडेट हिस्सा लेते हैं. लिहाजा यह एग्जाम कठिन से कठिनतर होती जा रही है. इस एग्जाम को क्रैक करने के लिए किसी भी कैंडिडेट के पास सही अध्ययन सामग्री और गाइडबुक होना बहुत जरुरी है.

इसलिए वैसी किताबों का सेलेक्शन करना चाहिए, को सब्जेक्ट को सही से कवर करता हो और सिलेबस के अनुसार हर टॉपिक की सही व्याख्या करता हो. हमेशा सर्वोत्तम और उपयुक्त अध्ययन सामग्री का उपयोग करना चाहिए, क्योंकि उपयुक्त अध्ययन सामग्री कैंडिडेट के समय की बचत तो करता ही है, साथ ही यह सीखने के प्रयासों को कम करता है.

सिलेबस को ध्यान में रखते हुए गाइडबुक का चयन करते समय विशेष सावधानी रखने की जरूरत है, क्योंकि भांति-भांति के गाइडबुक से बाजार भरा पड़ा है. अच्छे प्रकाशन और अच्छे ब्रांड की ही गाइडबुक ही लेनी चाहिए.

करेंट अफेयर्स की तैयारी के लिए एक मंथली मैगजीन और एक न्यूज पेपर को नियमित रूप से पढ़ना जरुरी है. इसकी तैयारी के लिए किसी अच्छे न्यूज वेबसाइट और यूट्यूब चैनल को भी फॉलो किया जा सकता है. कैंडिडेट को हार्डकॉपी और वेबसाइट को एक-दूसरे के पूरक (कॉम्प्लिमेंटरी) के तौर पर इस्तेमाल करना चाहिए. कैंडिडेट Google News को भी फॉलो कर सकते हैं.

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पढ़ने का टाइम टेबल बनाएं

किसी भी एग्जाम में सफलता पाने के लिए अच्छे से पढ़ना अनिवार्य शर्त है. SSC Exams भी इसका अपवाद नहीं है. इसलिए इस एग्जाम में सफल होने और अंतिम रूप से चयनित होने के लिए एक सूटेबल टाइम टेबल बनाएं और उसे स्ट्रिक्टली फॉलो करें.

पढ़ाई का समय तय करना जरुरी है. यह आपके अध्ययन में अनुशासन लाता है. इसके लिए आप दिन और रात को उपयुक्त टाइम स्लॉट (Time Slot) में बाँटें. आप यहाँ पर थोड़ी फ्लेक्सिबिलिटी और लिबर्टी ले सकते हैं, कि कब पढ़ें और कब नहीं पढ़ें.

इस संबंध में कम्पटीशन मिरर ने एक संक्षिप्त सर्वे किया और लगभग 500 से अधिक कैंडिडेट से बात किया. इस सर्वे से एक सामान्य निष्कर्ष यह निकला कि अधिकांश सफल कैंडिडेट ने अपने दिन और रात को पढ़ाई के लिए ‘थ्री टाइम स्लॉट नियम’ को फॉलो किया. यानी, 24 घंटे में किसी भी तीन समय-खंड, मसलन मॉर्निंग, आफ्टरनून और लेट इवनिंग, या फिर अर्ली मॉर्निंग, दोपहर (नून) और इवनिंग, या फिर लेट मॉर्निंग, आफ्टरनून और लेट नाईट में पढ़ाई की.

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पढ़ाई का टाइम मैनेजमेंट

लेकिन केवल पढ़ाई का समय तय करना ही काफी नहीं है. पढ़ाई का समय प्रबंधन (Time Management of Study) भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है. यदि आप स्टडी के लिए एक समय की स्लॉट में किसी विषय या टॉपिक विशेष को पढ़ने की योजना बनाते हैं, तो आप पूरे विषय या टॉपिक आसानी से कवर कर लेंगे. इसी प्रकार दूसरे टाइम स्लॉट में किसी और विषय और टॉपिक को पढ़ें. और इसी प्रकार तीसरे टाइम स्लॉट लिए किसी अन्य विषय या टॉपिक का चुनाव करें.

हर टाइम स्लॉट में केवल एक ही विषय को पढ़ने और उसे समाप्त करने के चक्कर में न पड़ें. एक तो यह बोरिंग हो जाएगा. इससे आप अन्य महत्त्वपूर्ण विषय में पीछे भी हो सकते हैं. साथ ही, SSC Exams Syllabus के अनुसार आपका अध्ययन संतुलित (balanced) नहीं हो पाएगा.

इसलिए विषय विशेष का अध्ययन करने के लिए एक टाइम स्लॉट के अनुसार एक नियमित क्रम बनाएं. सबसे बढ़िया यह होगा कि हर विषय को वैकल्पिक रूप से रोटेशन में पढ़ना चाहिए. यह आपके सीखने की गति और रूचि दोनों को बढ़ा देगा.

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प्रैक्टिस सेट बनाएं, मॉक टेस्ट दें

एक बार सिलेबस को सही से समझ लेने के बाद और सिलेबस के विषय और टॉपिक को पढ़ने के बाद अधिक-से-अधिक जितना संभव हो, प्रैक्टिस सेट बनाने की कोशिश करें. आप विषयवार (subject-wise) और टॉपिक के अनुसार (topic wise) प्रैक्टिस कर सकते हैं. यह आपके अध्ययन और ज्ञान में बढ़ोतरी करेगा. लेकिन बेहतर यह होता है कि कोई प्रैक्टिस सेट कम्प्लीट क्वेश्चन पेपर की तरह हो.

इसी तरह मॉक टेस्ट देना आज जरुरी हो गया. यह ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से दिया जा सकता है. मॉक टेस्ट आपको एग्जाम हॉल के प्रेशर को समझने और आपके समय प्रबंधन को रेग्यूलेट करने में करने में सहायता करता है. चूंकि मॉक टेस्ट में कम्प्लीट क्वेश्चन पेपर सॉल्व करना होता है, सो आप यह भी जान जाएंगे कि SSC Exams में किस प्रकार के क्वेश्चन आएंगे.

इस प्रकार आप जितना अधिक-से-अधिक प्रैक्टिस सेट बनाएंगे और जितना मॉक टेस्ट देंगे, आप में उतनी ही एक्यूरेसी आती जायेगी और आपकी स्पीड बढती जायेगी. और ये दोनों ही आपको SSC Exam में सफल कैंडिडेट बना देंगे.

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स्वयं का आकलन करें

SSC Exams का सिलेबस न तो बहुत अधिक कठिन है और न ही बहुत विस्तृत. यह एग्जाम वास्तव में स्पीड और एक्यूरेसी का मैच है, जिसे आपको जीतना है. इसे जीतने के लिए स्व-आकलन (Self Evaluation) भी बहुत जरूरी है. इसलिए यह भी आपकी स्ट्राटेजी यानी रणनीति का अहम हिस्सा होना चाहिए.

सेल्फ इवैल्यूएशन से आप यह पता लगा सकते हैं कि आपने जो अध्ययन किया है, उसमें से किस विषय और टॉपिक में काफी मजबूत या कमजोर हैं. स्वयं का आकलन करने से यह भी पता चलेगा कि किस-किस विषय या टॉपिक में आपको क्या मुश्किलें आती हैं. और, समय प्रबंधन में क्या प्रॉब्लम आ रही है.

प्रैक्टिस सेट और मॉक टेस्ट को सॉल्व करते समय इस बात को नोट करते चलें कि आप कहां-कहां खुद को कम्फर्टेबल पाते हैं और कहां-कहां फंसता हुआ महसूस करते हैं या कन्फ्यूज हो रहें. सेल्फ इवैल्यूएशन के बाद आप अपना अटेंशन आसान विषय से हटाकर मुश्किल विषय के अभ्यास के लिए दे सकते हैं.

उम्मीद है, यह ब्लॉग “SSC Exams की तैयारी कैसे करें” आपको SSC Exams की तैयारी में सहायक सिद्ध होगी.

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